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Wednesday, January 22, 2020

Your Real Sex Video, Right Away

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The Real Sex Video Of Paradise

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Go On, Get Your Real Sex Video Out

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Real Sex Video Never Lies

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Friday, January 17, 2020

कहानी पानी निकाले बिना रह नही पाओगे

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्राची है, और मैं कटनी के केन्द्रीय विद्यालय के अध्यापिका हूँ | ये मेरी रियल कहानी है जो मेरे साथ पिछले साल अगस्त में हुई थी, इस कहानी में मैं आपको बताउंगी कि कैसे मेरी एक स्टूडेंट की वजह से मेरे बदनामी के साथ साथ मुझे सजा भी भुगतनी पड़ी | अब मैं कहानी चालू करती हूँ|

हर साल आल इंडिया में केन्द्रीय विद्यालय में रीजनल स्पोर्ट्स मीट होता है |और कुछ टीचर्स को स्कूल के बच्चो को लेकर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है | तो मैं चेस कि टीम ले कर सागर गई थी केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-3 में सबके रुकने कि व्यवस्था थी | और मैं सिर्फ लड़किओं को लेकर गई हुई थी तो मेरे ऊपर जिम्मेदारी बहुत ज्यादा थी जबकि सभी ये बात जानते हैं कि सागर एरिया बहुत ख़राब है | रात के 8 बजे हम सब वहां पहुंचे थे और अपना अपना रूम देख रहे थे कि हमे कौन-सा रूम मिला है | 


तभी मेरी नजर एक सर पर पड़ी वो बहुत बदमाश टाइप के सर हैं और वो वहीँ लोकल सागर के ही हैं उनके बारे में सभी को पता है | रूम का पता चलने के बाद हम सब रूम में गए और वहां अपना अपना सामान जमाने लगे | तभी मेरी एक स्टूडेंट जिसका नाम दिव्या है उसने मुझसे कहा कि मैडम मुझे टॉयलेट आई है | तो मैंने कहा कि ठीक है तुम चले जाओ और फिर वहां से आ कर अपना सामान जमा लेना फिर वो वहां से चली गई और हम सब अपना अपना सामान ज़माने में लग गए |











तभी दिव्या वापस रोते रोते आई और तो मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ तुम्हे ? तुम रो क्यों रही हो ? वो रोये जा रही थी और मैं उससे बार बार पूछे जा रही थी क्या हुआ है मुझे बताओ | बहुत बोलने के बाद उसने मुझसे कहा कि मैडम जब मैं टॉयलेट जा रही थी तो वहां दो लड़के घुस आये और मेरा वीडियो बना लिए और बोल रहे हैं कि रात में 11 बजे हमे स्कूल के पीछे वाली पहाड़ी में आ कर मिलना नहीं तो तुम्हारा वीडियो सबको दिखा के तुम्हे बदनाम कर देंगे | 

ये बात सुनते ही साथ मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गई मेरे कान के परदे फट गए | मैंने उससे कहा कि देखो तुम रोना बंद करो तुम्हे परेशान होने की जरुरत नहीं है कौन है वो लड़के मैं देख लूंगी | फिर मैंने उसे चुप करा के रूम में भेज दिया और सोचने लगी कि वो लड़के कौन हो सकते हैं जो इतनी खराब हरकत कर सकते हैं ? फिर मैं भी रूम में आ गई और बच्चो से कहा कि मैं जा रही हूँ खाने का टोकन लेने | खाना भी बन ही रहा था तब फिर मैं टोकन ले के वापस आई और बच्चो को एक एक टोकन दे कर कहा कि 15 मिनट से सब खाना खाने चलेंगे | दिव्या से कहा कि तुम मेरे साथ रहना और मुझसे दूर मत जाना और उसने हाँ में सिर हिला दिया |

फिर हम सब खाना खाने लगे और खाने के बाद सब रूम की तरफ चल दिए | मैंने दिव्या से कहा कि तुम रात में सोना नहीं और मेरे साथ चलना जब सब सो जायेंगे | करीब 10:30 बजे तक मेरे रूम की सारी लड़कियां सो चुकी थी और मैंने चुपके से दिव्या को उठाया और कहा कि चलो मेरे साथ (मैंने उसे ले जाना इसलिए जरुरी समझा | क्यूंकि मैं उन कमीने बच्चो को नहीं जानती थी और मैं जानना चाहती थी कि कौन हैं ये बच्चे और किस स्कूल के हैं ताकि मैं उनकी शिकायत कर सकूं | फिर हम दोनों स्कूल के बाहर निकले तो पूरा सुनसान इलाका था | फिर मैंने सोचा कि मैं छुप जाती हूँ और इंतज़ार करती हूँ और देखती हूँ कि कौन बच्चे हैं ?

11 बजे तक वहां कोई नहीं आया था और हलकी बारिश हो रही थी और मुझे भी डर लग रहा था कि इतनी रात का वक़्त हैं कहीं मुझे ही लेने के देने न पड़ जाए | जैसे ही मैं निकलने को हुई तभी मेरे पीछे से किसी ने मुझे दबोच लिया और गले में चाकू अड़ा दिया (चाकू अड़ा कर उसने कहा कि ज्यादा होशियारी मत करना मैडम वरना तुम्हे यहीं कहीं ठिकाने लगा देंगे ) | मैं डर के मारे कुछ बोल भी न पाई और मैंने जब सामने देखा तो दो और लडकें थे जो दिव्या के गले में चाकू अड़ा कर उसे मेरे पास ला रहे थे | हलकी सी रौशनी में मैं एक लड़के को पहचान गई थी | 

और मुझे समझते जरा भी देर न लगी कि ये सब वही सर के स्टूडेंट्स हैं जिनकी इमेज हर स्कूल में खराब है | उन लोगों ने शांति से उनके पीछे आने का इशारा किया | एक लड़का हमारे आगे था और दो लड़के हमारे पीछे थे वो हम दोनों को स्कूल के पीछे वाली पहाड़ी पर ले जा रहे थे | 10 मिनट के बाद हम सब वहां पंहुचे तब तक वो बहुत खुश होने लगे कि चारा डाला एक बकरी को फ़साने के लिए और यहा देखो फस गई दो और वो जोर जोर से हसने लगे | और मैं मन ही मन बहुत रो रही थी कि कहाँ से मैं इनके चंगुल में फंस गई जैसा मैं सोच रही थी आखिर वही हुआ मेरे साथ | उनलोग ने हम दोनों से कहा कि अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो शोर मत मचाना और जो हम करना चाहते हैं वो करने देना वरना तुम दोनों को यहाँ ही मार देंगे |

उसमे से एक लड़के ने मुझे पेड़ से बाँध दिया और बाकि दो लडको ने दिव्या को पकड़ के उसके कपडे उतारने लगे वो चिल्ला रही थी और गिडगिडा रही थी कि उसे छोड़ दे पर वो कहाँ किसी कि सुनने वाले थे | वो तो बस अपनी ही धुन में सवार थे फिर उन दोनों ने दिव्या को नंगी कर दिया और उसे उसी के कपड़े में बिछा कर लेटा दिया | मैं ये सब नहीं देखना चाहती थी पर मैं क्या करती ये सब मेरी आँखों के सामने ही हो रहा था | फिर उनमे से एक लड़के ने उसके मुंह में लंड डाल दिया और दूसरा उसके दूध चूस रहा था | बेचारी बहुत घबरा रही थी और इन हैवानो को जरा भी रहम नहीं आ रहा था | 10 मिनट तक ऐसा करने के बाद जिसका नाम कार्तिक था उसने अपना लंड चुसाना चालु कर दिया और हेमंत ने उसकी चूत में जोरदार धक्का लगा के पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया | उसकी चीख निकल गई और वो जोर जोर से आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह  करने लगी और हेमंत उसकी चूत जोर जोर से चोदे जा रहा था | 15 मिनट तक चोदने के बाद वो उसकी चूत में ही झड गया और मेरे पास आ कर बैठ गया |

ऐसे ही हेमंत के बाद कार्तिक ने उसे चोदना चालू किय और अंकित उसकी गांड में अपना लंड डाल रहा था | उसकी चूत और गांड फट चुकी थी और वो आह्हह्हह्हह्हह ऊओह्हह्ह रुक जाओ कमीनो सांस तो लेने दो कह रही थी | करीब आधे गनते टक चोदा था हरामखोरों ने उसे और सब उसकी चूत में ही झड़ गए थे | उसकी चूत से मुठ निकलता जा रहा था बिलकुल अन्दर तक भर दिया था उसकी चूत को | मुझे लग रहा था जैसे साले प्यासे है चूत के लिए | फिर सब मेरे पास आकर बैठ गए और जिस लड़के का नाम हेमंत था उसने दिव्या से कहा चल कपडे पहन ले | तभी कार्तिक ने कहा अरे देखो उसकी चूत तो मारली अब मैडम को भी तो चखलो |

फिर सब भूके भेदिये कि तरह मुझे देखने लगे और धीरे धीरे मेरे पास आये | मेरे कपडे फटना शुरू हो गए और मेरे ब्रा और पेंटी को देखकर तो सारे लड़के पगा हो गए | उन सब ने मेरी चूत को मेरी पेंटी के ऊपर से ही चाटना शुरू कर दिया और कार्तिक मेरे दूध को ब्रा के ऊपर से पीने लगा | उन सब ने पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत में ऊँगली करना चालू कर दी थी | मैं उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म अह्हह्हह्हह्हह क्या कर रहे हो कहने लगी | १० मिनट बाद मेरी पूरी पेंटी गीली हो गयी | और सबने अपने लंड उठाये एक ने मेरी गांड में पेल दिया और दोस्सरे ने मेरी चूत में | मुझे चोद चोद के पागल कर दिया था और में बस उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म आअह्ह्ह्ह  आअह्ह्ह्ह कर रही थी |

फिर एक और लड़का आया जो हमारी विडियो बन रहा था | उसने कहा मैडम का गजब फिगर है मैं भी चोदुंगा | और अब मेरी चूत में दो लंड और गांड में एक और मुह में एक | सब ने मुझे ४० मिनट चोदा और मुठ मेरी चूत, गांड और मुह में भर दिया | अब हम दोनों लस्त पड़े हुए थे वो लोग चले गए और विडियो भी मिटा दिया | हमने इसके बारे में किसी को नहीं बताया और ना ही कभी कही गए |











तो दोस्तों आप सभी को मेरी इस जोरदार चुदाई की कहानी कैसी लगी कमेंट में जरुर बताइयेगा |

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Thursday, January 16, 2020

आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 2 || new stories - xstoryhindi

उसके इस प्रकार से मेरी चूत को देखने से मुझे शरम आ रही थी और मैंने अपनी चूत को एक हाथ से ढकने की नाकाम कोशिश की.. लेकिन राहुल ने मेरे हाथ को हटाकर शरारत भरी नज़रों से मुझे देखा और अपनी जीभ को बाहर निकलते हुए मेरी चूत के पास ले गया और अब में भी उसे कुछ करते हुए देखना चाहती थी.
तो मैंने देखा कि उसने अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी और अब मेरी आँखो का खुला रह पाना बहुत मुश्किल था. मैंने अपने दोनों पैरो को फैला दिया और उसने अपने होंठो को मेरी चूत के होंठो पर रखकर जीभ से मेरी चूत को सहलना और चूसना शुरू कर दिया और में मचलने लगी थी.
आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 2 || new stories - xstoryhindi

अब मेरे आस पास क्या हो रहा है.. इस बात की मुझे कोई खबर नहीं थी और में सिर्फ़ उस मज़े को ले रही थी जो मुझे चूत से मिल रहा था. आआआहह उफ़फ्फ़ राहुल आईईईईईईई की आवाज़े जाने कहाँ से मेरे मुहं से निकलने लगी थी और उसकी जीभ जब मेरी चूत के अंदर जाती.. तो मेरी एकदम से खुमारी बड़ जाती
मेरे लिए अब अपनी आँखें खुली रख पाना बहुत मुश्किल हो रहा था. तो मैंने आँखें बंद कर ली और उसको अपनी चूत के साथ खेलने की पूरी छूट दे दी.तो वो अब मेरी चूत को बहुत अच्छी तरह से चाट रहा था और मेरी कमर अपने आप मटकने लगी थी और मेरा मन यह कर रहा था कि वो अब मुझे जल्दी से चोद दे.. लेकिन पता नहीं क्यों उसे मेरी चूत को चूसने में बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने उसके सर के बालों को सहलाते हुए पकड़ा और उसे ऊपर की और ध्यान देने का इशारा किया.
उसने सीधे खड़े होकर मेरी कमर में अपना हाथ डाला और अपनी और खींच लिया. में उससे एकदम चिपक गई और उसने अब मेरे बदन पर चुम्बनों की बारिश कर दी.. मेरे हाथों पर, गालों पर, गले पर, बूब्स पर, हर जगह पर वो बस चूम रहा था और में उसकी आगोश में अपने आप को पिघलता हुआ सा महसूस कर रही थी.
उसने मेरे हर अंग को छूना और चूमना शुरू कर दिया था और मेरे बूब्स को तो वो दोनों हाथों से दबा भी रहा था और एक एक बूब्स को बारी बारी से चूस भी रहा था. तो मेरे बूब्स एकदम लाल होने लगे थे उनके निप्पल पर जब वो अपनी जीभ लगाता तो मेरी चूत में एक करंट सा लगता
में पूरी तरह से गुम हो गई थी. अब मैंने भी उसके कपड़े भी उतारना शुरू कर दिया.. उसके सुडौल जिस्म से जैसे जैसे में कपड़े उतार रही थी.. मुझे उससे चुदने का मन और कर रहा था और मैंने जब उसका लंड देखा तो में मचल गई. उसका बहुत बड़ा और मोटा सा लंड था. फिर मैंने राहुल की और देखा तो वो मुझे देखकर मुस्कुरा रहा था और में एकदम से शरमा गई और मैंने किचन की उस ऊंचाई पर ठीक से अपने पैरों को खोल दिया..
जैसे कि में उसको अपनी और आकर्षित कर रही थी कि आओ और मुझे चोद दो और फिर उसने ऐसा ही किया. उसने मेरे दोनों पैरों को अपने हाथों में लेते ही मुझे हल्का सा पीछे की और किया.. जिससे मेरी चूत उसके लंड की सीध में आ गया और उसने अपने लंड को किचन में रखे हुए तेल से हल्का सा चिकना किया और मेरी चूत के पास वापस लौट आया और मेरे पैरों को हल्का सा उठाकर मेरी चूत पर अपने लंड को टिका दिया.
मैंने अपने हाथ से पीछे की दीवार का सहारा ले लिया था.. मुझे यह तो अनुमान हो गया था कि अब राहुल मेरी चूत में अपने लंड को घुसाने वाला है और फिर उसने वही किया.. उसने मेरी चूत पर अपने लंड को टिकाकर मेरे कंधो को अपने हाथों से पकड़ा और एक धक्का मार दिया. तो अब मेरी तो एकदम जान सी निकल गई.. क्योंकि मेरी चूत की सील अभी तक नहीं टूटी थी और इसलिए लंड अंदर नहीं जा पाया और मेरी चूत के दर्द से में कराह उठी.
तो मैंने राहुल को मना किया कि प्लीज आज नहीं फिर कभी.. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी और उसने मेरी चूत पर टिके लंड को कसकर अंदर धक्का दिया और मुझे बहुत तेज़ दर्द हुआ आआआईईईईईईई उफफफफ.. मेरे मुहं से यह आवाज़ जाने कहाँ से निकलने लगी और जब मैंने आँखें खोलकर देखा तो मेरी चूत में राहुल का आधा लंड जा चुका था और में कहने लगी राहुल प्लीज अब इसे बाहर निकाल लो..
में तुमसे बाद में करवा लूंगी प्लीज.. लेकिन मेरी बातों का तो उस पर कोई असर ही नहीं हो रहा था. तो उसने एक और करारा धक्का मार दिया आअहह उह्ह्ह और अब उसका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर था और उसकी साँसे मेरे चेहरे पर पड़ रही थी. तो में उसकी खुश्बू भी सूंघ सकती थी और अब में उसकी हो गई थी..
में उससे लिपट गई और उसने मुझे चोदना शुरू कर दिया.. मेरी चूत पर उसका लंड अब धक्के पे धक्के मार रहा था और धीरे धीरे लंड मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ बनाता हुआ मुझे चोद रहा था और मेरी पूरी चूत उसके लंड की रगड़ से दर्द मचा रही थी.. लेकिन मेरी खुजली भी कम हो रही थी. अब तो में भी अपनी कमर को उछालकर उसके लंड को अपने अंदर समा लेना चाहती थी और उसका लंड मेरी चूत में उथल पुथल मचा रहा था.
फिर थोड़ी ही देर बाद हम दोनों ही झड़ गए.. उसका वीर्य मेरी चूत में ही निकल गया और वो मुझे अभी भी प्यार कर रहा था. मेरे बूब्स को हाथों से सहलाते हुआ मुझे चूम रहा था और में पूरी तरह से राहुल की हो गई थी.. लेकिन राहुल के दिमाग़ में कुछ और ही चल रहा था और उसने मुझे किचन में ही दो बार चोदा और फिर एक बार गांड मारकर चला गया और मुझसे रोज़ चुदवाने का वादा लिया और फिर उसी रात को मुझे वो अपने रूम पर बुलाकर ले गया..
मेरे ऊपर उसका नशा ऐसा सवार था कि मैंने उससे वादा भी कर लिया कि में उससे चुदवाने उसके कमरे में आ जाउंगी और जब रात हुई तो में अपने छोटे भाई को सुलाकर राहुल के रूम की और जाने की सोचने लगी और मैंने अपनी मेक्सी निकाली जो नीले कलर की है उसे में अक्सर पहन लेती हूँ.. लेकिन आज मैंने उसे बिना ब्रा और पेंटी के पहना था.. क्योंकि उसे मेरे बूब्स और चूत दोनों के दर्शन बाहर से ही हो जाते. तो में चाह रही थी कि राहुल मुझे देखते ही उत्तेजित हो जाए..
यह सब सोचते ही में राहुल के कमरे की और बड़ गई और जब में उसके कमरे पर पहुँची तो वो मेरा ही इंतजार कर रहा था. में उसके पास पूरी तरह सेक्सी बनकर गई थी.. क्योंकि दिन की चुदाई के बाद मेरी कामुकता बहुत बड़ गई थी और मेरी चूत यह सोच सोचकर पानी छोड़ रही थी कि में अभी कुछ देर में ही राहुल से दोबारा चुदने वाली हूँ.
फिर मैंने उसकी तरफ देखा और मेरा शरम के मारे बहुत बुरा हाल था. वो अपने बेड पर बैठा मुझे निहार रहा था.. मैंने नजरे चुराकर उसको देखा तो उसकी नज़र मेरे बूब्स पर थी और मेरी मेक्सी थोड़ी छोटी है तो मेरी गोरी गोरी नंगी जांघे उसको नज़र आ रही थी और मैंने आने से पहले अपने आप को एक बार कांच में देखा था..
में किसी सेक्सी फिल्म की हिरोईन लग रही थी. फिर उसने मुझे बुलाकर अपने पास बैठा लिया और बातें करने लगा.. लेकिन उसके हाथ मेरी जांघो पर, कभी बूब्स पर घूम रहे थे. उसने धीमे धीमे मेरी मेक्सी को उतारना शुरू कर दिया और एक एक बटन खोलकर उसने मेरी मेक्सी को एक तरफ हटा दिया. में अब बिल्कुल नंगी बैठी.. उससे बातें करने लगी. में अब थोड़ा कम शरमा रही थी और वो मेरे बूब्स को हाथों में लेकर धीमे धीमे खेल रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था.
तभी मुझे कुछ और अहसास हुआ और मेरी पीठ पर किसी और के हाथ भी चल रहे थे और जब मैंने घबराकर पीछे देखा तो वो अमित था और उसका एक और दोस्त भी वहाँ पर उपस्थित था. तो में बहुत घबरा गई और मैंने कहा कि राहुल यह सब क्या है? तो वो बोला कि कुछ नहीं है..
आशा देखो यह भी तुमको बहुत चाहता है और मुझसे कह रहा था कि मुझे भी एक बार आशा के साथ सेक्स करना है और मैंने उसको बता दिया कि तुम आज रात मुझसे चुदने आ रही हो. हाँ तो वो सब ठीक है.. लेकिन यह दूसरा कौन है? तो वो बोला कि यह अमित का दोस्त है और यह भी तुमको चोदना चाहता है. तो मैंने गुस्से में कहा कि राहुल क्या तुमने मुझे सबका सामान समझ रखा है कि कोई भी आएगा और में तुम्हारे कमरे पर आकर अपनी चुदाई करवा लूंगी.
फिर वो बोला कि अरे नहीं यार.. देखो एक बार चुदी या बार बार क्या फर्क पड़ता है.. तुम्हारी सील तो मैंने तोड़ दी है तो अब कितनी बार लंड अंदर गया.. किसी को क्या फर्क पड़ रहा है. तो मैंने उससे कहा कि नहीं राहुल में इन लोगों से नहीं करवा सकती. फिर वो बोला कि सुनो सुनो में एक बात कहता हूँ.. तुम सिर्फ एक बार करके देख लो अगर मज़ा आय तो करना वरना दोबारा मत करना.
मैंने कहा कि ठीक है और फिर मैंने भी सोचा कि वैसे भी में आई भी तो चुदवाने ही थी और अगर यह लोग भी अगर एक बार मुझे चोद लेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा और मैंने हाँ में सर हिला दिया. फिर तो जैसे अमित और उसके उस दोस्त की तो निकल पड़ी.. वो दोनों खुशी खुशी मुझे घेरकर बैठ गए और मज़े की बातें करते हुए मुझे यहाँ वहाँ छूने लगे और में उन तीनों के बीच एकदम नंगी बैठी हुई थी.
तभी अमित ने टीवी, सीडी प्लेयर पर एक सीडी लगा दी और हम लोग वो देखने लगे.. क्योंकि उसमे एक पॉर्न फिल्म चल थी.. जिसमे एक आदमी दो लड़कियों कि एक साथ चुदाई कर रहा था और जब वो फिल्म खत्म हुई तो दूसरी फिल्म शुरू हुई.
उसमे एक लड़की तीन मर्दों से चुदवा रही थी और पूरे पूरे लंड को अपने मुहं में ले रही थी और दो मर्द उसकी गांड और चूत दोनों में अपने लंड को डालकर चोद रहे थे. फिर यह सब देखकर मेरी चूत तो पानी छोड़ने लगी और शायद अब उन लोगों का भी मूड बनने लगा था. तो उन तीनों ने अपनी अपनी पेंट उतार फेंकी और मेरे सामने आ गए.. जिस प्रकार पॉर्न फिल्म में वो लड़की उन मर्दों का लंड चूस रही थ
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Wednesday, January 15, 2020

आशा की सामूहिक चुदाई भाग - 3 || new stories - xstoryhindi

मैंने भी अपने घुटनों पर बैठकर उन तीनो के लंड को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया.. लेकिन उनके लंड से अजीब सी स्मेल आ रही थी और में जब भी अपनी जीभ उनके लंड के सुपाड़े पर लगाती तो उनके लंड और भी खड़े और भी मोटे हो जाते और में हाथों से सहलाते हुए चूसने लगी. मुझे अब लंड चूसने में भी मज़ा आ रहा था और वो लंड के नीचे की लटकती हुई क्या मज़ेदार चीज होती है?
में तो उसे हाथों से मसलते हुए लंड को चूसने लगी और उन तीनों के मुहं से सिर्फ़ अह्ह्ह उह्ह और ज़ोर से चूसो प्लीज और ज़ोर से अह्ह्ह आवाज़ें निकलने लगी. फिर उन लोगों ने मुझे खड़ा किया और मेरे बूब्स पर अमित और उसका दोस्त टूट पड़े और राहुल मेरी चूत के निकट ही बैठ गया और वो मेरी चूत को चूसने लगा और अब मेरी आँखो से मुझे कुछ नहीं देखाई दे रहा था..

बस में यह समझ रही थी कि तीन मर्द मुझे प्यार कर रहे थे और मेरे हर एक अंग पर चुंबनो की बारिश हो रही थी. तब अमित अपने बेड के किनारे पर बैठ गया और अपने लंड को थूक लगाकर चुदाई के लिए तैयार करने लगा.
राहुल मुझसे बोला कि चल आशा अब अमित के लंड के मज़ा ले लो.. मैंने उसकी और मुस्कुराकर देखा और अमित के पास चली गई और अमित की कमर के दोनों और अपने घुटने रखकर उसकी छाती पर हाथ रखकर उसके खड़े तैयार लंड पर बैठ गई और लंड को मैंने अपने हाथों से अपनी चूत के मुहं पर रखा और मैंने अपनी चूत के होंठो को अपनी दो उंगलियों से खोला और लंड पर बैठती चली गई.. अमित ज़्यादा बलशाली था. उसने एक धक्का अपनी कमर को उठाकर मारा तो मेरी चूत को तो ऐसा लगा कि जैसे एक मोटा डंडा मेरी चूत में घुस गया हो.
तो मैंने आह भरी और उसके लंड को पूरा अपने अंदर समा लिया.. लेकिन अमित का लंड राहुल से बहुत बड़ा था.. क्योंकि में उसके लंड को अपने गर्भ की दीवार से छूता हुआ महसूस कर रही थी. तभी मुझे पीछे से कुछ हरकत महसूस हुई और मैंने देखा कि अमित के दोस्त ने मेरी गांड पर तेल लगाकर अपने लंड पर भी तेल लगा लिया है. तो में समझ गई कि अभी देखी गई फिल्म के सारे आसान मुझ पर ही ट्राई किय जाने वाले थे..
उसने अपने लंड को मेरी गांड पर टिकाया और मेरे दोनों चूतड़ों को अपने हाथों में पकड़कर हल्का सा फैलाया और धक्का मार दिया आआआउऊइईईईई माँ मरी और उसका पूरा लंड मेरी गांड में घुस गया था और में मुहं खोलकर आहें भर रही थी. तभी राहुल बेड पर खड़ा होकर आ गया
उसने अमित के कंधो के आसपास अपने पैर रखे और मेरे मुहं के पास अपने लंड को ले आया. मैंने उसको चूसना शुरू कर दिया और अब मेरे तीनों छेद भर गए थे और मेरी चूत में अमित का लंड घुसा हुआ था और मेरी गांड में अमित के दोस्त ने अपना लंड घुसा रखा था और मेरे मुहं में राहुल का लंड घुस गया था. अब अमित और उसके दोस्त ने मुझे चोदना भी शुरू कर दिया था..
यह अहसास गजब का था क्योंकि मेरी चुदाई बहुत अच्छे तरीके से हो रही थी.. उसका दोस्त मेरे बूब्स को पकड़कर मेरी गांड में धक्के मार रहा था और अमित नीचे लेटा हुआ अपनी कमर को मटकाते हुए मेरी चुदाई कर रहा था और राहुल के लंड को में चूस ही रही थी और राहुल ने मेरे सर के बालों को पकड़कर मेरे मुहं में अपने लंड को दबा दिया और मेरा पूरा मुहं लंड से भर गया..
मुझसे साँस भी नहीं ली जा रही थी.. लेकिन मुझे मज़ा भी बहुत आ रहा था. मुझे वो तीनों लोग बिल्कुल किसी पॉर्न फिल्म की तरह चोद रहे थे.. में पूरी तरह से चुदाई के मूड में थी और मेरी जमकर चुदाई हो रही थी फिर राहुल ने अपने लंड को मेरे मुहं से बाहर निकाला और अमित के दोस्त को हटाकर मेरी गांड मारने राहुल आ गया..
उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर लगाया और हल्का सा धक्का दिया और उसका लंड बड़ी ही आसानी से मेरी गांड में घुसता चला गया. अमित का दोस्त जिसका नाम रशीद था वो मेरे मुहं में अपने लंड को घुसाने आ गया था और मैंने भी उसको बड़े प्यार से देखा और उसके लंड को अपनी जीभ से चाटते हुए चूसने लगी. उसके लंड का स्वाद बहुत अच्छा लग रहा था और में उसको बहुत आनंद देना चाह रही थी.
फिर राहुल ने भी मेरी गांड पर धक्के मारने शुरू कर दिया और अमित नीचे से धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था. फिर हम लोग झड़ गए और हमारी पोज़िशन बदल गई. दोस्तों में कभी किसी के साथ लेटती तो कभी किसी के साथ.. में बारी बारी से सबसे चुदाई करवा रही थी और मैंने वो सारी रात उनके कमरे पर ही बिता दी.
फिर सुबह 4 बजे में नीचे आई मेरी चूत और गांड दोनों दर्द करने लगी थी.. लेकिन अभी भी मेरी भूख कम नहीं हुई थी और राहुल ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर मुझे अच्छी तरह से चोदा था. मुझे तो यह भी याद नहीं था कि में किससे कितनी बार चुदी.. हाँ, लेकिन यह याद था कि रशीद ने मुझे बिल्कुल नए अंदाज़ में चोदा था और उसने मुझे घोड़ी बनाकर लंड पीछे से चूत में डाला था और मेरी जामकर चुदाई की थी.
में नीचे आकर सो गई और सुबह 8 बजे मेरी आँख खुली. तो मैंने जल्दी जल्दी अपने छोटे भाई को नाश्ता बनाकर दिया और वो स्कूल चल गया और तब तक मेरा पूरा बदन दर्द कर रहा था.. लेकिन में शरीर में भरी हुई एक नई उमंग को महसूस कर रही थी.
दोस्तों फिर तभी दरवाजे पर घंटी बजी और मैंने दरवाजा खोला.. देखा तो अमित बाहर खड़ा हुआ था और में मुस्कुराकर दरवाजा खुला ही छोड़कर अंदर चली आई और सोफे पर बैठ गई. तो अमित भी मुस्कुराता हुआ आया और मेरे पास बैठ गया.. उसने मुझे बड़े प्यार से देखा और मैंने भी उसे मुस्कुराकर देखा. दोस्तों में उस समय सिर्फ़ टी-शर्ट और स्कर्ट पहने हुए थी और मैंने उसके अंदर पेंटी और ब्रा नहीं पहनी थी.. क्योंकि मुझे मालूम था कि यह लोग ज़रूर आएँगे तो ब्रा और पेंटी का क्या काम?
फिर में वैसे ही बैठी रही और मैंने अमित से कहा.. यार वो कल वाली फिल्म मुझे दोगे.. मुझे उसे पूरी देखना है. तो वो बोला कि देखने की क्या ज़रूरत है हम बना लेते है.. तुम हिरोइन बनना और हम सब लोग हीरो बन जाएगे.. अरे यार मज़ाक मत करो मुझे वो देखना है कि वो किस किस तरीके से चुदवाती है.
हाँ ठीक है राय दे दूंगा और यह कहते ही उसने अपना उल्टा हाथ मेरी गर्दन के पीछे से मेरे कंधे पर रखा और सोफे पर मुझसे चिपककर बैठ गया. मुझे अब अमित से बिल्कुल भी शरम नहीं आ रही थी और फिर मैंने टीवी चालू कर दिया और फिल्म देखने लगी.
अब अमित ने मेरी टी-शर्ट के ऊपर से ही मेरे बूब्स के निप्पल को छुआ और मेरे शरीर में आनंद भर गया. मैंने उसको मुड़कर देखा और उसने मुस्कुराते हुए मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और मैंने भी उसको किस कर लिया.. लेकिन वो मुझसे लंबा किस चाह रहा था..
तो मैंने उसके होंठो पर एक लंबा किस किया और उसने इतनी देर में अपना एक हाथ मेरी टीशर्ट के अंदर डाल दिया और मेरे बूब्स को छूने लगा, दबाने लगा और धीरे धीरे मेरी आँखें बंद होने लगी और में भी उसको इधर उधर छूने लगी और उसके बालों में हाथ फिराने लगी. फिर उसने अपने एक हाथ को मेरी स्कर्ट में डाल दिया और मेरी जांघो को छूते ही मेरी चूत तक जा पहुँचा और वो मेरी चूत को छूते ही बोला. अरे यार तुमने पेंटी क्यों नहीं पहनी है?
तो मैंने कहा कि मैंने अब पेंटी पहनना छोड़ दिया है. वो बोला कि बहुत अच्छा है.. अब तुम जब चाहो चुदवा सकती हो. तो मैंने कहा कि हाँ और क्या पेंटी में मुझे बहुत बुरा लगता है और अब वो मुझे फिर से चूमने लगा.. मेरी गर्दन पर, गालों पर, मेरे होंठो पर, मैंने अमित से कहा कि अमित प्लीज दरवाजा बंद कर लो.. वरना कोई आ जाएगा.
तो अमित ने दरवाजा बंद किया और फिर से हम दोनों एक दूसरे की बाहों में समा गए.. उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और फिर मेरी स्कर्ट मैंने खुद ही उतार दी और अब में फिर से एकदम नंगी अमित के सामने थी.. वो मुझे प्यार किए जा रहा था और मेरे बूब्स को चूसकर मेरे बदन पर सिर्फ़ अपने चुंबन ही चुंबन कर रहा था

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